Gulzar गुलझार

Gulzar गुलझार Gulzar गुलझार: “…खिड़की पिछवाड़े को खुलती तो नज़र आता था वो अमलताश का इक पेड़, ज़रा दूर, अकेला-सा खड़ा था शाखें पंखों की तरह खोले हुए एक परिन्दे …

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